मुंबई* । महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना की महायुति ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।
बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर रही, वहीं शिंदे गुट ने निर्णायक भूमिका निभाई। कांग्रेस, एमआईएम, मनसे और अन्य दल सीमित सीटों पर सिमट गए हैं।

बीएमसी जैसे प्रभावशाली नगर निकाय में महायुति की जीत को महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला संकेत माना जा रहा है। परिणामों के बाद महापौर पद और स्थायी समिति को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

*बीएमसी का जनादेश: मुंबई ने दिया गठबंधन राजनीति का स्पष्ट संकेत*

मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे केवल नगर निगम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति का संकेतक बनकर सामने आए हैं। इस चुनाव में जनता ने किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं दिया, लेकिन महायुति को सत्ता की चाबी सौंप दी।

बीजेपी का सबसे बड़ी पार्टी बनना यह दर्शाता है कि शहरी मतदाता अब स्थिरता और प्रशासनिक नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है। वहीं शिवसेना के दोनों गुटों में बंटा जनादेश यह बताता है कि भावनात्मक राजनीति की जगह अब स्पष्ट नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती निर्णायक बन रही है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का समय है। बीएमसी जैसे मंच पर कमजोर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि महानगरों में विपक्ष की पकड़ लगातार ढीली पड़ रही है।

अब बड़ी चुनौती यह होगी कि नई सत्ता मुंबई की बुनियादी समस्याओं—पानी, सड़क, आवास और पारदर्शिता—पर कितना खरा उतरती है। बीएमसी का जनादेश साफ है—सत्ता मिली है, अब जवाबदेही भी तय होगी।
*एक नजर में देखे किस पार्टी को कितनी सीट*

पार्टी अनुसार सीटें (BMC 2026)
BJP (भारतीय जनता पार्टी) – 89 सीटें
शिवसेना (Shinde faction) – 29 सीटें
शिवसेना (UBT – Uddhav Thackeray) – 65 सीटें
कांग्रेस – 24 सीटें
AIMIM – 8 सीटें
मनसे (MNS) – 6 सीटें
NCP – 3 सीटें
समाजवादी पार्टी (SP) – 2 सीटें
NCP (SP) – 1 सीट

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