सूरजपुर।
जिले के सोनपुर धान खरीदी केंद्र से प्रदेश के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने किसान दिलकेश्वर साहू एवं महतो राम से धान खरीदी कर प्रदेश स्तरीय धान खरीदी का शुभारंभ किया था। शुभारंभ अवसर पर मंत्री बघेल ने कहा था कि सरकार का उद्देश्य है कि धान खरीदी के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और किसानों की मेहनत से उपजाए गए धान का एक-एक दाना खरीदा जाए।

मंत्री ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया था कि सभी धान खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाएं सुचारू रहें और किसानों की समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।


निर्देशों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था

मंत्री के निर्देशों के बावजूद धान खरीदी के शुभारंभ से लेकर अंतिम चरण तक किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। खरीदी के शुरुआती दिनों में एग्रीटेक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद शासन द्वारा प्रत्येक धान खरीदी केंद्र में प्रतिदिन निर्धारित खरीदी लिमिट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

टोकन नहीं, समितियों के चक्कर

खरीदी के अंतिम दिनों तक किसान अपनी मेहनत से उपजाए गए धान को बेचने के लिए लगातार समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें टोकन नहीं मिल पा रहा है। समिति प्रबंधकों द्वारा किसानों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि धान बेचने के लिए पटवारी के माध्यम से भौतिक सत्यापन कराना आवश्यक है।

नीति पर उठ रहे सवाल

किसानों और जनप्रतिनिधियों का सवाल है कि जब एग्रीटेक पोर्टल के माध्यम से पहले ही ऑनलाइन सत्यापन किया जा चुका है और जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में गिरदावली कर धान उपार्जन को लेकर गहन पुनरीक्षण भी किया गया है, तो फिर खरीदी के अंतिम चरण में किसानों से दोबारा भौतिक सत्यापन के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है।

किसानों का दर्द

किसानों का कहना है कि इस वर्ष उन्हें अपनी मेहनत से उपजाए गए धान को बेचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। शासन द्वारा लागू किए गए एग्रीटेक नियम और खरीदी लिमिट ने उनकी परेशानियां बढ़ा दीं। अंतिम दिनों में भी धान बेचने की प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।
किसानों का आरोप है कि सरकार की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। यदि सरकार वास्तव में किसान हितैषी होती, तो धान खरीदी की प्रक्रिया को सरल और सहज बनाकर किसानों को राहत पहुंचाई जाती।

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