सूरजपुर। राज्य सरकार द्वारा आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सूरजपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिश्रामपुर से सामने आया है, जहां एक मासूम बच्ची की सिकलिंग जांच रिपोर्ट गलत बनाए जाने का गंभीर आरोप लगा है।

अवराडुगू कुंजनगर निवासी मोहम्मद मुबारक अपनी 12 माह की पुत्री जन्नत को सिकलिंग जांच के लिए बिश्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए थे। अस्पताल की प्रयोगशाला में जांच के बाद बच्ची की रिपोर्ट सिकलिंग पॉजिटिव बताई गई। रिपोर्ट देखकर पिता मोहम्मद मुबारक ने लैब स्टाफ से पूछा कि जब माता-पिता दोनों को सिकलिंग की कोई समस्या नहीं है, तो बच्ची पॉजिटिव कैसे आई। इस पर लैब कर्मियों द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया।
पिता के आपत्ति जताने और उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कहने पर लैब में दोबारा जांच की गई, जिसमें रिपोर्ट सिकलिंग नेगेटिव आई। बताया गया कि पहले की पॉजिटिव रिपोर्ट को लैब कर्मियों ने फाड़ कर फेंक दिया।

संदेह बरकरार रहने पर मोहम्मद मुबारक ने अपनी पत्नी चांदनी और पुत्री जन्नत का पुनः परीक्षण अंबिकापुर स्थित तेज डायग्नोस्टिक सेंटर में कराया, जहां तीनों की सिकलिंग रिपोर्ट नेगेटिव आया।

मोहम्मद मुबारक ने कहा कि यदि गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू कर दिया जाता, तो उनकी मासूम बच्ची को गंभीर शारीरिक नुकसान तक पहुंच सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि बिश्रामपुर स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही आम हो चुकी है, और कर्मचारियों का व्यवहार भी मरीजों के प्रति ठीक नहीं है।

उन्होंने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है* *साथ ही स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार की भी अपील की है।
