अंबिकापुर/सरगुजा।
छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के बैनर तले सरगुजा संभाग के हजारों कर्मचारी 03 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर आए हैं।

सरगुजा संभाग  के समस्त जिलों के समिति कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन इसी तरह आगे भी जारी रहेगा।

सहकारी कर्मचारी संघ की चार सूत्रीय प्रमुख मांगें

कर्मचारियों ने बैनर और ज्ञापन के माध्यम से अपनी लंबित चार प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं

1. मध्यप्रदेश सरकार के तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा भी  प्रदेश के 2058  सहकारी समिति कर्मचारियों के वेतनमान व अन्य सुविधाये लाभ देने हेतु प्रत्येक समिति को प्रतिवर्ष 3-3 लाख रुपये की प्रबंधकीय अनुदान राशि देने शीघ्र आदेशित की जाबे।

2. सेवा नियम 2018 की आंशिक संशोधन करते हुए  पुनरीक्षित वेतनमान लागू की जावे 50% भर्ती सहकारी समितियों के अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।

3. समर्थन मूल्य धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 मे धान परिवहन पश्चात हुई सुखत को मान्य किया जावे सुरक्षा व्यय प्रासंगिक व्यय तथा कमीशन खाद बीज उपभोक्ता फसल बीमा आदि को चार गुना बढ़ोतरी कर राशन वितरण पर प्रति क्विंटल 500 ग्राम क्षतिपूर्ति ₹5000 दी जावे ।

4. धान खरीदी नीति वर्ष 2024- 25 मैं वर्णित कडी का क्रमांक 11.3.3. आउटसोर्सिंग द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर के नियोजन को विलोपित कर विभाग तय करते हुए नियमितीकरण किया जावे एवं पूर्व वर्ष की भांति वर्ष भर 12 माह का मानदेय नियमित रूप से प्रदाय किया जाए ।

आंदोलन से धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका

हड़ताल के चलते इस बार धान खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। समितियों में कंप्यूटर ऑपरेटरों और कर्मचारियों के न रहने से किसानों के पंजीयन, टोकन जारी करने और डेटा अपलोड जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। कर्मचारियों का कहना है कि शासन समय पर उनकी मांगों पर विचार करे, अन्यथा इसका सीधा प्रभाव राज्य की धान खरीदी व्यवस्था पर पड़ेगा।

संघ का बयान – “वर्षों से अनसुनी हो रही हमारी आवाज़”

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से वेतनमान, मानदेय और नियमितीकरण की मांगें उठाई जा रही हैं, परंतु अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई।
हमारा आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए है,” – ऐसा कहना है संघ का। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक शासन से लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना और हड़ताल जारी रहेगी।

शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा हैं अपने हक को लेकर आंदोलन

धरना स्थल पर कर्मचारी शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में डटे हैं। बैनर, तख्तियां और ज्ञापन के माध्यम से वे शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए संघ के पदाधिकारी लगातार निगरानी भी कर रहे हैं।

शासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

कर्मचारियों का कहना है कि वे शासन से संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन अभी तक कोई प्रतिनिधि बात करने नहीं पहुंचा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो हड़ताल का दायरा राज्यस्तर पर और व्यापक किया जाएगा।

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