सूरजपुर। जिले में लंबे समय से सक्रिय लकड़ी माफियाओं का आतंक एक बार फिर सुर्खियों में है। दूसरे राज्यों से आए गिरोह द्वारा नीलगिरी के पेड़ों की अंधाधुंध अवैध कटाई और परिवहन के मामले में प्रशासन की कार्यवाही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बीते 29 अक्टूबर 2025 को भाजपा नेता संजय गुप्ता उर्फ बबलू की सूचना पर राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम ने परी क्षेत्र में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान चार ट्रकों में अवैध रूप से लदी नीलगिरी की लकड़ियां बरामद की गईं।

तहसीलदार सूर्यकांत साय के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में जब लकड़ी स्वामी से वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। टीम ने तत्परता दिखाते हुए सभी ट्रकों को अपनी निगरानी में लेकर फॉरेस्ट विभाग को सुपुर्द किया।
कार्यवाही के बाद वैध दस्तावेजों की तैयारी पर उठे सवाल
कार्यवाही के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब लकड़ी व्यापारियों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे, तो कार्रवाई के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें कटाई की अनुमति आखिर कैसे मिल गई?
सूत्रों के अनुसार, जिन ट्रकों पर कार्यवाही हुई थी, उनमें से एक ट्रक (CG12AM6485) को विभाग के द्वारा ₹10,000 का मामूली चालान काटने के बाद पुनः लकड़ी स्वामी को सौंपने की तैयारी की जा रही थी।

इसी दौरान यह खुलासा हुआ कि अनी बाई, निवासी ग्राम तिलसिवा, को उसी दिन यानी 29 अक्टूबर को ही 109 पेड़ों की कटाई की अनुमति एसडीएम कार्यालय सूरजपुर से जारी की गई थी — जबकि लकड़ी की कटाई और लोडिंग पहले ही हो चुकी थी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि लकड़ी माफियाओं और राजस्व विभाग के बीच किसी स्तर पर मिलीभगत हो सकती है।
राजस्व और वन विभाग पर उठ रहे गंभीर प्रश्न
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और विभागीय लापरवाही के चलते लकड़ी माफिया निडर होकर जिले में हरियाली उजाड़ रहे हैं। सवाल यह भी है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ही एक ही दिन में पेड़ कटाई की अनुमति कैसे जारी हो जाती है

क्या यह संयोग है या फिर माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गहरा गठजोड़
प्रशासन की नरमी से बढ़ रहा माफियाओं का हौसला
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी किसी शिकायत पर कार्रवाई होती है, तो आरोपी मामूली चालान भरकर छूट जाते हैं। इससे कानून का डर खत्म होता जा रहा है।
*ऐसी स्थिति में जिले के युवाओं के बीच यह संदेश जा रहा है कि अवैध काम करना आसान है और कार्रवाई का डर नहीं। यह प्रवृत्ति भविष्य में सामाजिक और पर्यावरणीय संकट को और बढ़ा सकती है।

अब प्रशासन को दिखाना होगा सख्त रुख
सूरजपुर जिले में लगातार बढ़ रही अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी को रोकने के लिए प्रशासन को कठोर कदम उठाने की अब आवश्यकता है।*
*अगर अब भी विभागीय स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में सूरजपुर की हरियाली का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
