सूरजपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन इसी राज्य के अन्नदाता इन दिनों धान विक्रय के लिए भारी परेशानी झेल रहे हैं। सूरजपुर जिले में स्थिति यह है कि ऑनलाइन टोकन होने के बावजूद किसानों को धान खरीदी केंद्रों में कई–कई दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

हाल ही में प्रदेश के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने सूरजपुर जिले के चंदरपुर धान खरीदी केंद्र से इस वर्ष की धान खरीदी का शुभारंभ किया था। शुभारंभ के दौरान उन्होंने आश्वासन दिया था कि प्रदेश के सभी किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदा जाएगा तथा प्रत्येक खरीदी केंद्र में किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

मंत्री बघेल द्वारा राज्य सरकार की “तूहर टोकन” मोबाइल एप का भी विशेष उल्लेख किया गया था, जिसे किसानों की सुविधा हेतु लॉन्च किया गया है, ताकि वे केंद्र में भटकने के बजाय मोबाइल के माध्यम से घर बैठकर ही धान विक्रय हेतु टोकन बुक कर सकें।
1538 क्विंटल प्रतिदिन खरीदी की सीमा बनी बड़ी बाधा
हालाँकि एप के माध्यम से टोकन बुकिंग सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन धान खरीदी केंद्रों में प्रतिदिन 1538 क्विंटल ही निर्धारित
खरीदी सीमा किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। इस सीमा के कारण लगातार टोकन 10–15 दिनों बाद तक बुक हो रहे हैं, जिससे किसान धान लेकर केंद्र पहुँचने के बाद भी वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
सूरजपुर, सरगुजा, बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों से ऐसी ही शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें कई दिनों तक धान को घर पर संजोकर रखना पड़ रहा है, जिससे दाना खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

मोबाइल ऐप का उपयोग न कर पाने वाले किसान सबसे अधिक प्रभावित
ग्रामीण अंचलों में एक बड़ी संख्या ऐसे किसानों की है जो स्मार्टफोन या इंटरनेट का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे किसान सीधे धान खरीदी केंद्र पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें पता चलता है कि online टोकन 10–15 दिन तक पहले से ही बुक हैं।
इससे उनमें निराशा और असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है। कई किसान मजबूरीवश धान वापस घर ले जाने को विवश हैं।
किसानों की मांग– 1538 क्विंटल की सीमा समाप्त कर 100% खरीदी सुनिश्चित की जाए
अन्नदाताओं का स्पष्ट कहना है कि जब प्रदेश सरकार ने शत-प्रतिशत धान खरीदी का आश्वासन दिया है, तो प्रतिदिन 1538 क्विंटल की बाध्यता को तुरंत समाप्त किया जाए।
यदि यह सीमा नहीं हटाई गई तो बड़ी संख्या में किसान समय पर धान विक्रय नहीं कर पाएँगे, जिससे खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठना तय है।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
किसानों की मांग है कि शासन एवं जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या का त्वरित संज्ञान लेते हुए खरीदी व्यवस्था को सुचारू करे तथा प्रतिदिन खरीदी सीमा हटाकर सभी किसानों का विधिवत धान खरीदा जाए।
किसान संगठन भी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि अन्नदाताओं की मेहनत से उपजी फसल पूरी तरह खरीदी जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
