सूरजपुर। शहर में भारी व मालवाहक वाहनों के लिए लागू नो एंट्री व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। शहर के चारों ओर लगाए गए नो एंट्री बोर्ड या तो पूरी तरह धूमिल हो चुके हैं या फिर इतने छोटे हैं कि दूर से आते भारी वाहनों के ड्राइवरों को स्पष्ट दिखाई ही नहीं देते। कई स्थानों पर तो बोर्ड में लिखे गए निर्देश और समय की जानकारी लगभग मिट चुकी है, जिसके कारण बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालक अनजाने में ही शहर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं।

विडंबना यह है कि जब यही वाहन शहर के अंदर पहुंच जाते हैं, तब ट्रैफिक विभाग द्वारा उन पर चालानी कार्रवाई कर दी जाती है। ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि जब नियमों की जानकारी देने वाले बोर्ड ही स्पष्ट नहीं हैं, तो ड्राइवर आखिर नियमों का पालन कैसे करें?
शहर के कई प्रमुख प्रवेश मार्गों पर लगे नो एंट्री बोर्ड वर्षों से अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। कहीं अक्षर धुंधले हो चुके हैं तो कहीं बोर्ड इतने छोटे हैं कि तेज गति से आते वाहनों के चालक उन्हें पढ़ ही नहीं पाते। इसके बावजूद कार्रवाई पूरी सख्ती से की जा रही है, जिसे लेकर वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

लोगों का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए केवल चालान काटना ही समाधान नहीं है। सबसे पहले प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहर के चारों ओर लगे नो एंट्री बोर्ड स्पष्ट, बड़े और दूर से दिखाई देने वाले हों। साथ ही बोर्ड पर भारी वाहनों के प्रवेश का समय भी साफ-साफ लिखा होना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
इसके अलावा शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और प्रवेश मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी जरूरी है, ताकि बाहर से आने वाले मालवाहक व भारी वाहन चालकों को समय रहते नो एंट्री की जानकारी मिल सके और वे शहर के भीतर प्रवेश करने से बच सकें।

फिलहाल स्थिति यह है कि शहर में लगे धुंधले और छोटे नो एंट्री बोर्ड प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग समय रहते इन बोर्डों को दुरुस्त कर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाए, ताकि वाहन चालकों को नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके और अनावश्यक चालानी कार्रवाई से भी बचा जा सके।
