सूरजपुर। जिले के सावरावा धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी शुभारंभ के बाद किसानों के द्वारा अपने मेहनत से उपजाए धान को शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करते हुए ऑनलाइन टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से काटकर निर्धारित दिन में धान खरीदी केंद्र में ले जाकर धान को बेचा गया।

लेकिन वही धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक विभु प्रताप सिंह एवं खरीदी प्रभारी रिजवान खान के आपसी मिलीभगत से करोड़ों की धान घोटाला करने की साजिश अंदर ही अंदर रची जा रही थी।

इस घोटाले की भनक क्षेत्र के भोले-भाले किसानों को न थी यह तो समझ आता है, पर जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी केंद्र में नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी व जिम्मेदार पटवारी को आखिर इसकी भनक क्यों नहीं लगी, जबकि उनकी निगरानी में ही धान खरीदी व्यवस्थित रूप से संचालित हो रहा था।

जिला प्रशासन द्वारा जारी पत्र में सामने आया बड़ा अंतर

कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार 30 जनवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी भैयाथान द्वारा जांच दल का गठन किया गया था। जांच दल ने 1 फरवरी 2026 को सावारावा उपार्जन केंद्र का भौतिक सत्यापन किया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में केंद्र में 65,813.60 क्विंटल धान (1,64,534 बोरी) दर्ज था, जबकि मौके पर भौतिक सत्यापन में केवल 32,975.60 क्विंटल धान (82,439 बोरी) ही उपलब्ध पाया गया।
इस तरह सत्यापन के बाद कुल 32,838 क्विंटल धान (82,095 बोरी) की कमी सामने आई थी।

वारदाना में भी मिली गड़बड़ी
जांच में वारदाना (धान रखने की बोरी) की संख्या में भी अंतर पाया गया। भौतिक सत्यापन में कुल 40,750 वारदाना उपलब्ध मिले, जबकि ऑनलाइन रिपोर्ट में 32,789 वारदाना दर्ज थे।

कलेक्टर ने दिए थे FIR के निर्देश

करोड़ों की धान की हेरा फेरी करने वाले समिति प्रबंधक और खरीदी प्रभारी के ऊपर कलेक्टर ने FIR करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर ने शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, ओड़गी को निर्देशित किया था कि खरीदी प्रभारी रिजवान खान के खिलाफ प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज कर इसकी जानकारी कलेक्टर कार्यालय को भेजी जाए।
लेकिन प्रशासनिक पत्र जारी हुए 33 दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश पत्र का पालन नहीं हुआ। प्राथमिक एफआईआर दर्ज करने हेतु जारी प्रशासनिक पत्र अब मजाक का पात्र बनता हुआ नजर आ रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब घोटालेबाजों के ऊपर एफआईआर दर्ज करना ही नहीं था तो प्रशासनिक पत्र क्यों जारी किया गया।

पिछले वर्षों की जांच हो तो और खुल सकते हैं मामले

धान खरीदी वर्ष 2025–26 में सावारावा धान खरीदी केंद्र में 32,838 क्विंटल धान भौतिक सत्यापन में कम पाया गया है। वहीं कई सूत्र यह भी बताते हैं कि यदि पिछले वर्षों के रिकॉर्ड का भी प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बारीकी से और निष्पक्ष तरीके से जांच किया जाए तो कई और घोटाले और कई कारनामे सामने आ सकते हैं।

एक ही जिले में कार्रवाई के अलग मापदंड?

एक ही जिले में धान खरीदी केंद्रों पर की जाने वाली कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले के उमेश्वरपुर धान खरीदी केंद्र में अनियमितता सामने आते ही तत्काल FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।
लेकिन वहीं सावारावा मामले में 33 दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई लंबित रहने से यह संकेत मिल रहा है कि एक ही जिले में प्रशासनिक कार्रवाई के अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं।

राजनीतिक संरक्षण की भी चर्चा

लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि क्या सावारावा धान खरीदी प्रबंधक और खरीदी प्रभारी की पहुंच जिला प्रशासन से भी ऊपर स्तर के अधिकारियों या राजनेताओं तक है, या फिर इन्हें किसी का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
जिस कारण से जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी भी विभाग द्वारा जारी पत्र का पालन कराने में अपने आप को असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा घोटाले का खतरा

यदि आने वाले समय में इन पर कार्रवाई नहीं हुई तो अगले धान खरीदी सत्र में कई अन्य धान खरीदी केंद्रों के प्रबंधक व खरीदी प्रभारी भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी करने की साजिश रच सकते हैं। क्योंकि जब विभाग द्वारा जारी कार्रवाई पत्र का ही पालन नहीं होगा तो घोटालेबाजों के मन में कानून का डर खत्म हो सकता है।

जनता का भरोसा कमजोर

विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए जो पत्र जारी किया गया था, उसके 33 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक अमले से लेकर जमीनी स्तर तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सन्नाटा और खामोशी दिखाई दे रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग अपने द्वारा जारी पत्र के अनुरूप दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करेगा या यह पत्र सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

अब देखना यह होगा कि आखिर प्रशासन कब तक उचित कार्रवाई करता है।

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