सूरजपुर। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से लाखों रुपये की ठगी करने और फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार करने के मामले में माननीय न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) के जिला अध्यक्ष हेमंत महंत को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस फैसले को नौकरी के नाम पर हो रही ठगी के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी अशोक दास ने दिनांक 10 जुलाई 2018 को थाना प्रेमनगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी हेमंत महंत पिता सुंदर दास सोनवानी, निवासी ग्राम चंदननगर थाना प्रेमनगर ने आबकारी विभाग में भृत्य (चपरासी) की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाकर उससे 1 लाख रुपये लिए थे। आरोपी ने स्वयं को प्रभावशाली बताते हुए नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया और बाद में प्रार्थी को नियुक्ति आदेश भी सौंप दिया।

हालांकि जब प्रार्थी संबंधित विभाग में ज्वाइनिंग एवं दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुंचा, तब उसे पता चला कि दिया गया नियुक्ति आदेश पूरी तरह फर्जी है। मामले का खुलासा होने के बाद प्रार्थी ने थाना प्रेमनगर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 53/18 के तहत धारा 420, 467, 468 एवं 471 भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक निरीक्षक बसंत लाल सिंह द्वारा की गई। जांच के दौरान दस्तावेजों, गवाहों एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण जुटाए और आरोप पत्र माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय सूरजपुर में प्रस्तुत किया।

अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ राजेश सिंह एवं पंकज कुमार बागड़े ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से सरकारी नौकरी का लालच देकर प्रार्थी से रकम वसूली और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे गुमराह किया।
मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सूरजपुर श्रीमती रूचि मिश्रा की अदालत में हुई।

न्यायालय ने समस्त तथ्यों, दस्तावेजी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान का परीक्षण करने के बाद आरोपी हेमंत महंत को दोषी ठहराया और दिनांक 13 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
न्यायालय के इस फैसले को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों एवं फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। वहीं आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसों की मांग करने वालों से सतर्क रहें तथा नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का विभागीय सत्यापन अवश्य कराएं।

error: Content is protected !!