सरगुजा/अंबिकापुर। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को मिल रही सुविधाएं इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही हैं। सरगुजा संभाग में Ola Electric की स्कूटी खरीदने वाले कई वाहन स्वामी इन दिनों गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। महंगी कीमत पर स्कूटी खरीदने के बाद उपभोक्ताओं को न तो समय पर सर्विस मिल पा रही है और न ही तकनीकी समस्याओं का समाधान।
फोन नहीं उठते, समाधान नहीं मिलता

वाहन स्वामियों का आरोप है कि सरगुजा जिले में संचालित ओला शोरूम में जब भी इलेक्ट्रिकल या तकनीकी खराबी को लेकर संपर्क किया जाता है, तो वहां कार्यरत कर्मचारियों द्वारा फोन तक नहीं उठाया जाता। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
इतना ही नहीं, कंपनी की आधिकारिक हेल्पलाइन और ओला केयर पर संपर्क करने पर भी ठोस समाधान नहीं मिल रहा। दुर्घटना या वाहन के किसी पार्ट के खराब होने की स्थिति में न तो तत्काल सहायता उपलब्ध हो रही है और न ही स्पेयर पार्ट्स समय पर मिल पा रहे हैं।
स्पेयर पार्ट्स के लिए महीनों का इंतजार

सबसे बड़ी समस्या स्कूटी के पार्ट्स की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है। उपभोक्ताओं के अनुसार, शोरूम में आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध नहीं रहते। ऑर्डर देने के बाद कई-कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे वाहन बेकार खड़ा रहता है और उपभोक्ताओं को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
सब्सिडी का वादा, लेकिन लाभ अधर में

स्कूटी की खरीद के समय उपभोक्ताओं से सब्सिडी दिलाने का आश्वासन दिया जाता है। ग्राहकों का कहना है कि शोरूम में बिक्री के दौरान व्यवहार बेहद विनम्र रहता है और सरकारी सब्सिडी का लाभ शीघ्र दिलाने का भरोसा दिया जाता है।
हालांकि, कई ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्हें स्कूटी खरीदे एक से दो वर्ष तक हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो सब्सिडी की राशि मिली और न ही उनके आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई। इसे लेकर शोरूम प्रबंधन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
संभाग के अन्य शोरूम बंद, बढ़ी दूरी की समस्या

सूत्रों के अनुसार, सरगुजा संभाग के अन्य जिलों में खुले ओला शोरूम भी बंद हो चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए अंबिकापुर स्थित शोरूम का रुख करना पड़ता है। दूर-दराज़ क्षेत्रों से आने वाले वाहन स्वामियों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक और समय की मार साबित हो रहा है।
सरकार के प्रयासों पर पानी फेर रही अव्यवस्था
जहां एक ओर सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं,

वहीं दूसरी ओर सेवा और रखरखाव की अव्यवस्था उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगा रही है।
ओला वाहन स्वामियों में बढ़ते आक्रोश और नाराजगी को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज कराएंगे और व्यवस्थाओं के सुधार हेतु आवाज बुलंद करेंगे।
अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या कदम उठाते हैं, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति का सपना उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण न बने।
