सूरजपुर – जिले के सोनपुर धान खरीदी केंद्र से प्रदेश के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने इस वर्ष की धान खरीदी का शुभारंभ किया था। शुभारंभ के दौरान मंत्री ने कहा था कि सरकार का उद्देश्य है कि धान खरीदी के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और किसानों की मेहनत से उपजाए गए धान का एक-एक दाना खरीदा जाए।

मंत्री ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सभी धान खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाएं सुचारू रहें और किसानों की समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है तथा उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

धान खरीदी के शुभारंभ से पहले चार सूत्रीय मांगों को लेकर सहकारी समिति कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार थी जारी

आखिर क्या थी मांगे पढ़े एक नजर में

संघ की चार प्रमुख मांगें
मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी प्रदेश के 2058 सहकारी समिति कर्मचारियों के वेतनमान व अन्य सुविधाओं हेतु प्रत्येक समिति को प्रतिवर्ष 3-3 लाख रुपये की प्रबंधकीय अनुदान राशि देने आदेश जारी किया जाए।


सेवा नियम 2018 में आंशिक संशोधन करते हुए पुनरीक्षित वेतनमान लागू किया जाए तथा 50% भर्ती में अनुभवी समिति कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।


समर्थन मूल्य धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में धान परिवहन पश्चात हुई सुखत को मान्य किया जाए तथा सुरक्षा व्यय, प्रासंगिक व्यय, कमीशन सहित अन्य मदों में चार गुना वृद्धि की जाए।

धान खरीदी नीति वर्ष 2024-25 में वर्णित कड़ी क्रमांक 11.3.3 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर नियोजन को समाप्त कर नियमितीकरण किया जाए एवं पूर्व वर्ष की भांति 12 माह का मानदेय नियमित रूप से प्रदान किया जाए।

धान खरीदी के बीच कलेक्टर ने ली थी मिलर्स की बैठक, उठाव में तेजी लाने के दिए थे निर्देश

जिले में जारी समर्थन मूल्य धान खरीदी व्यवस्था को और अधिक सुचारू, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर एस. जयवर्धन ने धान मिलर्स की समीक्षा बैठक ली। बैठक में खाद्य विभाग, डीएमओ मार्कफेड, डीएम नागरिक आपूर्ति निगम, एफसीआई सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान नगर पालिका उपाध्यक्ष शैलेष गोयल भी मौजूद रहे थे।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने जिले में धान उठाव की वर्तमान स्थिति, गोदामों की उपलब्धता, मिलर्स के पास बारदाना की स्थिति तथा धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि धान उठाव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए तथा खरीदी केंद्रों में समयबद्ध उठाव सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर ने मिल पंजीयन अनुबंध, बैंक गारंटी जमा करने की स्थिति, समितियों में समय पर बारदाना जमा कराने एवं उठाव में तेजी लाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मिलर्स से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप धान खरीदी एवं उठाव की प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित होनी चाहिए।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों एवं मिलर्स को निर्देश दिए कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और जिले में धान खरीदी व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित की जा सके।

जिले के कुछ धान खरीदी केदो में भौतिक सत्यापन के दौरान धान की कमी पाए जाने पर प्रशासन के द्वारा धान उठाब को पूर्णतः बंद कर दिया गया

जिले में जारी धान खरीदी व्यवस्था की लगातार समीक्षा किए जाने के बावजूद धान के उठाव की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

धान खरीदी समाप्त होने के बाद कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन द्वारा राइस मिलर्स की बैठक लेकर धान उठाव में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं,

लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है।

विगत दिनों कलेक्टर सूरजपुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में खाद्य विभाग, मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम, एफसीआई के प्रतिनिधि एवं जिले के राइस मिलर्स उपस्थित थे।

बैठक में कलेक्टर ने कहा था कि धान खरीदी केंद्रों से समय पर उठाव नहीं होने की स्थिति में व्यवस्थाए प्रभावित हो सकती हैं

इसलिए सभी मिलर्स को धान उठाव में तेजी लानी होगी। इसके बावजूद जिले के अधिकांश सहकारी धान खरीदी केंद्रों से धान का उठाव या तो नहीं हो पा रहा है या बेहद धीमी गति से किया जा रहा है ।

धान की बंपर खरीदी के चलते केंद्रों मे धान का भंडारण अत्यधिक हो गया है। खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे धान रखा हुआ है, जिससे धान के सूखने एवं खराब होने की आशंका बनी हुई है।

प्रबंधकों को आशंका है कि यदि जल्द उठाव नहीं हुआ तो धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, वहीं प्रबंधकों पर व्यवस्था संभालने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और धान सूखता होने से होने वाले हानि की चिंता दिन रात सता रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह पहली बार बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में धान खरीदी के दौरान धान उठाव की प्रक्रिया लगभग पूर्णतः बंद जैसी स्थिति में देखी गई। इसका सीधा असर सूरजपुर जिले सहित प्रदेश के कई जिलों के धान खरीदी केंद्रों पर देखने को मिला।


जानकारी के अनुसार, इस वर्ष धान की बंपर खरीदी होने के कारण खरीदी केंद्रों में धान का भंडारण अत्यधिक हो गया है। वहीं दूसरी ओर, राइस मिलर्स द्वारा कराए जा रहे उठाव में तेजी नहीं आ पा रही है। बताया जा रहा है कि कई मिलर्स के पास सीमित संख्या में वाहन होने के कारण उठाव की गति काफी धीमी है।


धान उठाव की धीमी रफ्तार से सहकारी समितियों के प्रबंधकों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां उठाव में तेजी लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं, ताकि खरीदी केंद्रों में जाम धान का समय पर परिवहन हो सके और समितियों को किसी प्रकार की समस्या ब नुकसान का सामना न करना पड़े।

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