सूरजपुर। प्रदेश में धान खरीदी का शुभारंभ होते ही किसानों में अपने धान को बेचने की उत्सुकता बढ़ गई है, लेकिन सूरजपुर जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में प्रतिदिन खरीदी लिमिट तय होने से किसान गहरी समस्या से जूझ रहे हैं।

ऑनलाइन टोकन होने के बावजूद किसानों को कई–कई दिनों तक खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विदित हो कि सूरजपुर जिले के चंदरपुर धान खरीदी केंद्र से राज्य के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने धान खरीदी का शुभारंभ किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि सरकार द्वारा लॉन्च किए गए तूहर टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से किसान घर बैठे धान विक्रय हेतु टोकन प्राप्त कर सकेंगे और खरीदी केंद्रों में हर सुविधा उपलब्ध रहेगी।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि धान खरीदी केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिदिन खरीदी लिमिट के कारण उनका धान समय पर नहीं खरीदा जा रहा, जिससे उन्हें खेत से लेकर मंडी तक भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनलाइन टोकन 10–15 दिनों तक फुल बुक, किसान परेशान
केंद्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई धान खरीदी केंद्रों में ऑनलाइन टोकन 10 से 15 दिनों तक बुक है। जिले के अनेक किसान स्मार्टफोन या डिजिटल सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण वे सीधे खरीदी केंद्र पहुंचकर धान बेचने का प्रयास करते हैं। वहां उन्हें पता चलता है कि टोकन उपलब्ध नहीं है और निर्धारित लिमिट के चलते उनका धान नहीं खरीदा जाएगा, ऐसे में उन्हें धान वापस घर ले जाना पड़ रहा है। इससे किसानों में भारी असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

प्रतिनिधि कर रहे समस्याओं का निरीक्षण, पर समाधान अभी अधूरा

प्रेमनगर विधानसभा के विधायक भूलन सिंह मरावी, जनपद सदस्यों सहित कई जनप्रतिनिधि लगातार धान खरीदी केंद्रों का दौरा कर किसानों की समस्याएं सुन रहे हैं। किसानों ने प्रतिनिधियों के समक्ष प्रतिदिन खरीदी लिमिट समाप्त कर शत-प्रतिशत धान खरीदी की मांग रखी है। जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को जिला प्रशासन और राज्य शासन तक पहुंचाने की बात कही है।
इसके बावजूद अब तक खरीदी लिमिट न बढ़ने से किसानों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। किसान मांग कर रहे हैं कि शासन त्वरित निर्णय लेकर खरीदी लिमिट समाप्त करे, ताकि प्रदेश के अन्नदाताओं की मेहनत की उपज समय रहते खरीदी जा सके और उन्हें किसी तरह की आर्थिक या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों की स्पष्ट मांग – खरीदी लिमिट समाप्त कर शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित की जाए।

