सूरजपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री के गृह जिले सूरजपुर में सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। जिले के 2080 में से 311 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी खुद के भवन से वंचित हैं और जर्जर हालत वाले किराए के मकानों में संचालित हो रहे हैं। बारिश के मौसम में इन केंद्रों की हालत और बदतर हो चुकी है—जहां बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सेहत तीनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बरसात में टपकती छतें, कीचड़ भरे फर्श और दीवारों में सीलन—सरकारी दावों की खुली पोल

गंदगी और खतरे के बीच मासूमों की परवरिश
कई आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ-सफाई नाममात्र की है। कीचड़ भरे फर्श, टपकती छतें और सीलन भरी दीवारों के बीच बच्चों को बैठाया जा रहा है। कुछ केंद्रों में जहरीले कीड़ों और बिच्छुओं का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे मासूम बच्चों की जान तक खतरे में है।

‘कुपोषण मुक्त’ के दावे खोखले!
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर कुपोषण मुक्त अभियान चला रही है, तो दूसरी ओर बच्चों के बैठने तक के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। अफसोस की बात ये है कि जिस जिले की विधायक खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं, वहीं की हालत सबसे बदतर है।

रेडी टू ईट योजना पर भी सवाल
विभागीय सूत्रों के मुताबिक “रेडी टू ईट” योजना में भी गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। पूर्व में पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ यदि निष्पक्ष जांच हो, तो करोड़ों की अनियमितताओं का खुलासा संभव है।

जनता की मांग: जवाबदेही तय हो जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि सभी आंगनबाड़ी भवनों की समीक्षा कर जर्जर भवनों की मरम्मत हो और जहां भवन नहीं हैं वहां निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। साथ ही रेडी टू ईट योजना में हुई गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल ने बताया हैं कि 186 पुराने भवनों को निष्कासित कर उनके स्थान पर नए भवनों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बारिश के चलते फिलहाल अस्थायी तौर पर किराए के भवनों में संचालन बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बरसात खत्म होगी, स्थायी भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज की जाएगी और स्वच्छता को लेकर भी सभी केंद्रों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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