सूरजपुर। खरीफ सीजन के बीच जब जयनगर सहकारी समिति मर्यादित के अंतर्गत आने वाले हजारों किसान बेहतर फसल उत्पादन की उम्मीद के साथ खेतों की तैयारी में जुटे थे, तब उन्हें सबसे अधिक जिस चीज की आवश्यकता थी, वही खाद उनके लिए संकट बन गई। किसान एक-एक बोरी उर्वरक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर रहे, जबकि दूसरी ओर समिति के गोदाम में लाखों रुपये मूल्य के उर्वरक में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

किसानों का आरोप है कि जयनगर सहकारी समिति में उर्वरक वितरण और भंडारण के नाम पर लंबे समय से अनियमितताएं की जा रही थीं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब किसानों को यह जानकारी मिली कि समिति में खाद का बड़ा भ्रष्टाचार खेला जा रहा है और इसके केंद्र में समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति हैं। किसानों ने सामूहिक रूप से इस मामले की शिकायत नवपदस्थ कलेक्टर रेना जमील से की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं अनिल कुमार बनज को विस्तृत जांच के निर्देश दिए।

अनिल कुमार बनज उप पंजीयक सरजपुर
संयुक्त जांच में सामने आई लाखों की अनियमितता
कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने समिति के अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टर और गोदाम में उपलब्ध उर्वरक का मिलान किया। प्रारंभिक जांच में लगभग 20 लाख रुपये मूल्य का उर्वरक कम पाया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि समिति में गंभीर वित्तीय और भंडारण संबंधी अनियमितताएं हुई हैं।
उप पंजीयक अनिल कुमार बनज ने बताया कि मामले की जांच विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा की जा रही है। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि जांच के दौरान समिति के दस्तावेजों, अभिलेखों और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।

वर्तमान सत्र से लेकर दो वर्ष पुराने रिकॉर्ड तक खंगाले जा रहे
जांच केवल वर्तमान खरीफ सत्र तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि इस सत्र में वितरित कृषि ऋण, धान, बीज, उर्वरक तथा पिछले दो वर्षों के दौरान प्रबंधक के कार्यकाल में हुए समस्त लेन-देन और भंडारण संबंधी रिकॉर्ड की सूक्ष्म जांच की जा रही है। समिति की वित्तीय स्थिति, स्टॉक प्रबंधन और वितरण प्रक्रिया के प्रत्येक पहलू की पड़ताल की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक अनियमितता का दायरा और बड़ा भी हो सकता है।
अंतिम रिपोर्ट के बाद एफआईआर और कठोर कार्रवाई तय
जांच दल अभी भी उर्वरक की वास्तविक कमी, वितरण प्रक्रिया, अभिलेखों के सत्यापन और अन्य वित्तीय पहलुओं की जांच में जुटा है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कलेक्टर के निर्देशानुसार समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के साथ-साथ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
85 लाख के पुराने धान घोटाले की फाइल भी खुली
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि श्यामलाल प्रजापति का नाम पूर्व में लगभग 85 लाख रुपये के धान घोटाले में भी सामने आ चुका है, जिसमें उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हुई थी। अब नए खाद घोटाले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने उस पुराने मामले को भी संज्ञान में लेते हुए जांच के दायरे में शामिल कर लिया है।
इससे यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि यदि पूर्व के गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो क्या आज किसानों को खाद संकट और सहकारी समिति में इस स्तर के भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता?

किसानों का आक्रोश: निलंबन नहीं, अब बर्खास्तगी हो
जयनगर क्षेत्र के किसानों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि बार-बार भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निलंबन की कार्रवाई कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को बच निकलने का अवसर दिया जाता है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि हर बार भ्रष्टाचार के मामलों में सुर्खियों में रहने वाले समिति प्रबंधक श्यामलाल प्रजापति के विरुद्ध इस बार केवल निलंबन नहीं, बल्कि स्थायी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए, ताकि सहकारी समितियों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लग सके और किसानों का विश्वास बहाल हो।

भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी कीमत किसान चुका रहे
यह मामला केवल 20 लाख रुपये मूल्य के उर्वरक की कमी का नहीं, बल्कि उस सहकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है जिसके भरोसे किसानों को खाद, बीज, ऋण और अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। जब समिति के गोदाम से उर्वरक गायब हो और किसान खेती के मौसम में एक-एक बोरी खाद के लिए भटकते रहें, तब यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों और उनकी मेहनत पर सीधा डाका है।
अब पूरे जिले की निगाहें कलेक्टर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच, एफआईआर और कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो यह न केवल जयनगर बल्कि जिले की अन्य सहकारी समितियों में भी जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश होगा।

