सूरजपुर। एक और सरकार किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सूरजपुर स्थित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय का भवन अपनी जर्जर स्थिति के कारण इन दावों की हकीकत बयां करता नजर आता है। वर्षों पुराने इस भवन की हालत ऐसी हो चुकी है कि पहली नजर में ही इसकी बदहाली साफ दिखाई देती है।

कार्यालय भवन की दीवारों से जगह-जगह प्लास्टर उखड़ चुका है। बाहरी दीवारों पर दरारें और सीलन के निशान दिखाई देते हैं। छत की स्थिति भी चिंताजनक नजर आती है, जबकि भवन के सामने लगा बोर्ड भी पुराना और फीका पड़ चुका है। कार्यालय परिसर में साफ-सफाई और रखरखाव की कमी भी स्पष्ट दिखाई देती है।
यह वही कार्यालय है जहां जिले के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बीज एवं उर्वरक वितरण, कृषि अनुदान, फसल प्रदर्शन, तकनीकी सलाह सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी और लाभ लेने के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं। लेकिन जिस भवन में विभाग संचालित हो रहा है, उसकी स्थिति स्वयं सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

सुरक्षा को लेकर भी चिंता
कार्यालय की जर्जर स्थिति कर्मचारियों और यहां आने वाले किसानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। बरसात के मौसम में पुराने भवनों में पानी का रिसाव, प्लास्टर गिरने और अन्य हादसों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

कृषि विभाग की छवि पर असर
कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग का कार्यालय यदि स्वयं बदहाल स्थिति में होगा तो इसका असर विभाग की कार्यप्रणाली और छवि पर भी पड़ता है। किसानों का कहना है कि कृषि योजनाओं के साथ-साथ कार्यालयों के बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में सेवाएं मिल सकें।

जीर्णोद्धार की मांग
स्थानीय लोगों और किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय भवन का तकनीकी निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए। यदि भवन उपयोग के योग्य नहीं है तो नए कार्यालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि कर्मचारियों और किसानों दोनों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण मिल सके।
