सूरजपुर। जिला बनने के बाद जहां सूरजपुर में लगभग सभी प्रमुख शासकीय विभागों की स्थापना हो चुकी है, वहीं शहर के सुनियोजित विकास का सबसे महत्वपूर्ण विभाग नगर तथा ग्राम निवेश (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) आज भी जिले में स्थापित नहीं हो सका है। इसका परिणाम यह है कि भवन निर्माण अनुमति, ले-आउट स्वीकृति, भूमि विकास और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निवेशकों को आज भी अंबिकापुर का चक्कर लगाना पड़ता है। दूसरी ओर, शहर के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2041 तक के नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शासन स्तर पर जारी है।

सूरजपुर को 15 अगस्त 2011 को जिले का दर्जा मिला और 1 जनवरी 2012 से यह नया जिला अस्तित्व में आया। हालांकि शहर के नियोजित विकास की आधारशिला इससे पहले ही रखी जा चुकी थी। तत्कालीन सरगुजा जिले के अंतर्गत 10 जनवरी 2008 को सूरजपुर निवेश क्षेत्र का गठन किया गया था, जिसके आधार पर वर्ष 2021 तक की विकास योजना तैयार की गई। इस योजना में शहर के साथ आसपास के कई गांवों को शामिल कर भविष्य के विस्तार को व्यवस्थित दिशा देने का प्रयास किया गया था।

अब 2021 की योजना की अवधि पूरी होने के बाद नई विकास योजना-2041 तैयार की जा रही है। प्रस्तावित निवेश क्षेत्र में सूरजपुर, डुमरिया, महगवा, नगदगिरी, सरस्वतीपुर, गिरवरगंज, नयनपुर, पचिरा, तिलसिवा, बेलटीकरी, लांची, देवीपुर, मानपुर, पम्पापुर, गोपालपुर, चन्द्रपुर और पतरापारा सहित कई क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इसी मास्टर प्लान के आधार पर भविष्य में शहर के आवासीय, व्यावसायिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के साथ सड़क नेटवर्क, बाईपास, सार्वजनिक संस्थान, पार्क, अस्पताल और अन्य आधारभूत सुविधाओं की दिशा तय होगी।

पेसा कानून के कारण अपनाई जा रही वैधानिक प्रक्रिया

सरगुजा संभाग में पेसा कानून लागू होने के कारण विकास योजना को अंतिम मंजूरी देने से पहले संबंधित ग्राम सभाओं की सहमति लेना अनिवार्य है। जानकारी के अनुसार ग्राम सभाओं के साथ प्रथम चरण की बैठक पूरी हो चुकी है। अब दावे-आपत्तियों के निराकरण तथा अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद मास्टर प्लान को अंतिम स्वीकृति मिलने की संभावना है।

2016 से चल रही है विकास योजना की प्रक्रिया
सूरजपुर की विकास योजना को लेकर राज्य शासन ने 20 अप्रैल 2016 को छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 17(क) के तहत एक समिति का गठन किया था, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया।

इसके बाद 28 जुलाई 2021 को समिति का पुनर्गठन किया गया। 14 नवंबर 2022 को विकास योजना का प्रारूप प्रकाशित हुआ तथा 2 दिसंबर 2022 को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। अब बदलती परिस्थितियों और शहर के विस्तार को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2041 तक की नई विकास योजना तैयार की जा रही है।

शहर के भविष्य की आधारशिला है मास्टर प्लान
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग किसी भी शहर के व्यवस्थित विकास का प्रमुख आधार माना जाता है। यही विभाग तय करता है कि आने वाले वर्षों में शहर किस दिशा में विकसित होगा, नई कॉलोनियां कहां बसेंगी, व्यावसायिक क्षेत्र कहां विकसित होंगे, भविष्य की सड़कें, बाईपास, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं किन क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर नियोजन नहीं होने पर शहर अनियोजित विस्तार, यातायात दबाव और आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझने लगता है।

टीसीपी कार्यालय नहीं होने से बढ़ रही लोगों की परेशानी

जिले में नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय नहीं होने के कारण भवन निर्माण, नक्शा स्वीकृति, ले-आउट अनुमति सहित अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए लोगों को हर बार अंबिकापुर जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। लंबे समय से जिले में इस कार्यालय की स्थापना की मांग उठती रही है।

कलेक्टर की पहल से बढ़ी उम्मीद

सूत्रों के अनुसार सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील जिले में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का कार्यालय शुरू कराने के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास कर रही हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो जिले के लोगों को अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। हालांकि इस संबंध में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण उनसे चर्चा नहीं हो सकी।

अब जिलेवासियों की नजरें दो महत्वपूर्ण निर्णयों पर टिकी हैं—पहला, 2041 के मास्टर प्लान को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और दूसरा, सूरजपुर में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का जिला कार्यालय कब स्थापित होगा। यदि दोनों पहल समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में सूरजपुर का विकास अधिक व्यवस्थित, संतुलित और दूरदर्शी तरीके से आगे बढ़ सकेगा। इससे न केवल शहर का स्वरूप बदलेगा, बल्कि नागरिकों को भी बेहतर शहरी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

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