सूरजपुर। सावांरावा धान खरीदी केंद्र में 32,838 क्विंटल धान की कमी उजागर होने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। 10 फरवरी को कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित थाने में मामला दर्ज न होना प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर धान की कमी सामने आने के बाद तत्काल कठोर कार्रवाई अपेक्षित थी, लेकिन आदेश के 10 दिन बाद भी कार्रवाई अधर में लटकी हुई है। प्रशासनिक सूत्र लगातार “प्रक्रिया जारी है” कहकर मामले को टालते नजर आ रहे हैं, जिससे किसानों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

चर्चा यह भी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले की फाइलें भी कहीं दबकर न रह जाएं।

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई की आंच पहुंच सकती है, इसी वजह से मामला ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एफआईआर में हो रही देरी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

किसानों का कहना है कि जब छोटी-सी त्रुटि पर उन पर सख्ती दिखाई जाती है, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी पर प्रशासन की चुप्पी क्यों? जनता अब जिला प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्यवाही का इंतजार कर रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
आखिर आदेश के बाद भी कार्रवाई कब होगी?
और क्या दोषियों पर वास्तव में शिकंजा कसेगा, या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?

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