सूरजपुर। पर्यावरण संरक्षण और जनहित को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा स्थापित वाहन प्रदूषण जांच केंद्र (PUC) आज सूरजपुर जिले में खुद अव्यवस्था का शिकार हो चुके हैं।
जिन केंद्रों का उद्देश्य वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और आम नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना था, वही व्यवस्था अब पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है।
जिले की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। शहर में लंबे समय से संचालित श्री साईं प्रदूषण जांच केंद्र, जो नगर पालिका के पास स्थित था, वह भी बंद हो चुका है। इसके अलावा अधिकांश PUC केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं, जिससे वाहन स्वामियों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं कई बार उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक ओर केंद्र बंद हैं, तो दूसरी ओर ट्रैफिक विभाग द्वारा बिना PUC प्रमाण पत्र के चालानी कार्रवाई लगातार जारी है, जिससे आम नागरिक दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
प्रदूषण केंद्र संचालक मनीष द्विवेदी ने बताया कि इस समस्या की जड़ लाइसेंस रिन्यूअल प्रक्रिया की जटिलता है। हर वर्ष होने वाला रिन्यूअल 2 से 3 महीने तक लंबित रहता है। जैसे ही लाइसेंस की अवधि समाप्त होती है, केंद्र संचालकों की आईडी तुरंत बंद कर दी जाती है, जिससे केंद्रों का संचालन पूरी तरह ठप हो जाता है। पहले यह प्रक्रिया जिला स्तर पर पूरी हो जाती थी, लेकिन अब इसे रायपुर स्थित परिवहन विभाग कार्यालय से जोड़े जाने के कारण अनावश्यक देरी हो रही है।

संचालकों का कहना है कि वे समय से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर देते हैं, इसके बावजूद रिन्यूअल समय पर नहीं हो पाता। उन्होंने मांग की है कि रिन्यूअल प्रक्रिया को सरल किया जाए और इसकी अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर कम से कम दो वर्ष की जाए, ताकि सेवाएं बाधित न हों।
जानकारों के अनुसार, नियमित प्रदूषण जांच का अभाव पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। यदि समय पर वाहनों की जांच नहीं होगी, तो वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
वाहन स्वामियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि जब जिले में प्रदूषण जांच केंद्र ही बंद हैं, तो वे PUC प्रमाण पत्र कहां से बनवाएं। इसके बावजूद ट्रैफिक विभाग द्वारा चालान काटा जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की है कि जब तक सभी केंद्र सुचारु रूप से संचालित नहीं हो जाते, तब तक PUC प्रमाण पत्र को लेकर चालानी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस गंभीर समस्या पर जिला परिवहन अधिकारी और संबंधित प्रशासन कब तक मौन रहेंगे। आवश्यकता इस बात की है कि रिन्यूअल प्रक्रिया को समय रहते पूरा किया जाए, उसे सरल बनाया जाए और बंद पड़े केंद्रों को तत्काल शुरू कराया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना भी कायम रह सके।
