सूरजपुर। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा के बड़े-बड़े दावों के बीच सूरजपुर जिले में वाहन प्रदूषण जांच व्यवस्था खुद सरकारी जटिल प्रक्रियाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिन प्रदूषण जांच केंद्रों (PUC) को वाहनों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण और आम जनता को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, वही केंद्र आज लाइसेंस रिन्यूअल की उलझी व्यवस्था में फंसकर महीनों से बंद पड़े हैं।

स्थिति यह है कि शहर में लंबे समय से संचालित वाहन प्रदूषण जांच केंद्रों के शटर गिरे हुए हैं, जबकि दूसरी ओर ट्रैफिक विभाग बिना PUC प्रमाण पत्र वाले वाहन चालकों पर लगातार चालानी कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में आम नागरिक खुद को सरकारी व्यवस्था और नियमों के बीच पिसता हुआ महसूस कर रहे हैं।

नगर पालिका के समीप संचालित श्री साईं प्रदूषण जांच केंद्र सहित जिले के कई PUC केंद्र लगभग तीन महीने से बंद पड़े हैं। वाहन स्वामियों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए घंटों भटकना पड़ रहा है। कई लोगों को दूसरे शहरों तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों बढ़ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में प्रदूषण जांच की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, तब वाहन चालकों पर कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है? जनता का कहना है कि व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां सुविधा बंद है और दंड जारी है।
प्रदूषण केंद्र संचालक मनीष द्विवेदी के अनुसार समस्या की सबसे बड़ी वजह लाइसेंस रिन्यूअल प्रक्रिया की जटिलता है। पहले यह प्रक्रिया जिला स्तर पर पूरी हो जाती थी, लेकिन अब इसे रायपुर मुख्यालय से जोड़ दिए जाने के कारण महीनों तक फाइलें अटकी रहती हैं। जैसे ही लाइसेंस की अवधि समाप्त होती है, केंद्र संचालकों की आईडी तत्काल बंद कर दी जाती है, जिससे पूरा संचालन ठप हो जाता है।

संचालकों का कहना है कि समय से दस्तावेज जमा करने के बावजूद रिन्यूअल नहीं हो पाता। उनका आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि पर्यावरण सुरक्षा की मूल व्यवस्था ही बाधित हो रही है। उन्होंने मांग की है कि रिन्यूअल प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और इसकी अवधि कम से कम दो वर्ष की जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वाहनों की नियमित प्रदूषण जांच नहीं होगी, तो इसका सीधा असर वायु गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा। सरकार एक ओर पर्यावरण संरक्षण और शुद्ध वातावरण की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं व्यवस्थाओं को समय पर संचालित रखने में प्रशासनिक ढिलाई दिखाई दे रही है।

अब जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ आम जनता पर ही क्यों थोपी जा रही है? यदि शासन की जटिल प्रक्रिया के कारण प्रदूषण जांच केंद्र बंद पड़े हैं, तो उसकी सजा वाहन स्वामियों को क्यों भुगतनी पड़े?

जनता ने मांग की है कि बंद पड़े सभी PUC केंद्रों का लाइसेंस रिन्यूअल तत्काल किया जाए, प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और जब तक जिले में सभी केंद्र सुचारु रूप से शुरू नहीं हो जाते, तब तक PUC प्रमाण पत्र को लेकर चालानी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

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