सूरजपुर।* प्रशासनिक उदासीनता और अस्थायी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रहे सूरजपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की स्थिति अब जिले के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। वर्ष 2023 से अब तक सूरजपुर आरटीओ कार्यालय में नियमित एवं पूर्ण प्रभार वाले आरटीओ अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण न केवल आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि राज्य शासन को भी लगातार राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी अधिकारी की नियुक्ति की गई होती तो जिले में वाहन पंजीयन और परिवहन सेवाओं की स्थिति पूरी तरह अलग होती।

मिली जानकारी के अनुसार सूरजपुर जिले में खरीदी जा रही अधिकांश नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन स्थानीय आरटीओ कार्यालय के बजाय अंबिकापुर आरटीओ कार्यालय में कराया जा रहा है। परिणामस्वरूप वाहन पंजीयन शुल्क, कर और अन्य परिवहन मदों से प्राप्त होने वाला राजस्व सूरजपुर के बजाय अंबिकापुर के माध्यम से जमा हो रहा है। पिछले लगभग तीन वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, जिससे शासन को संभावित रूप से करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
अस्थायी व्यवस्था से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल*
स्थानीय नागरिकों और वाहन स्वामियों का आरोप है कि सूरजपुर आरटीओ कार्यालय लंबे समय से पूर्णकालिक नेतृत्व से वंचित है। वर्तमान में पदस्थ नितिन सिंह भी प्रभारी आरटीओ के रूप में पदस्थ हैं। ऐसे में कार्यालय का संचालन अस्थायी व्यवस्था के सहारे किया जा रहा है, जिसका सीधा असर कार्यों की गति, जवाबदेही और सेवा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब किसी विभाग का प्रमुख अधिकारी ही नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होगा तो प्रशासनिक कार्यों में सुगमता और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी।

*ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन पंजीयन तक हर काम में परेशानी*
सूरजपुर जिले के लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन पंजीयन, नामांतरण, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, टैक्स भुगतान तथा अन्य परिवहन संबंधी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में नागरिकों को अंबिकापुर तक जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और श्रम तीनों की अतिरिक्त हानि होती है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को विशेष रूप से अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक साधारण परिवहन संबंधी कार्य के लिए भी कई बार पूरे दिन का समय और अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
राजस्व भी गया, सुविधा भी नहीं मिली*
लोगो का यह कहना है कि किसी भी जिले में आरटीओ कार्यालय केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि राजस्व संग्रह का महत्वपूर्ण केंद्र भी होता है। यदि जिले में खरीदी गई नई गाड़ियों का पंजीयन दूसरे जिले में हो रहा है, तो यह सीधे-सीधे स्थानीय राजस्व व्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर वर्ष 2023 से अब तक सूरजपुर आरटीओ कार्यालय में स्थायी एवं पूर्ण प्रभार वाले अधिकारी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई।

*जिलेवासियों की मांग—तत्काल हो नियमित आरटीओ अधिकारी की नियुक्ति*
सूरजपुर जिले के नागरिकों, वाहन स्वामियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राज्य शासन तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि सूरजपुर परिवहन कार्यालय में स्थायी एवं नियमित आरटीओ अधिकारी की शीघ्र नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि इससे एक ओर लोगों को परिवहन संबंधी कार्यों में हो रही अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राज्य शासन को हो रही संभावित राजस्व क्षति पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
जिलेवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि सूरजपुर को पूर्णकालिक आरटीओ अधिकारी उपलब्ध कराया जाए तो परिवहन विभाग की सेवाएं अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बन सकती हैं तथा जिले का राजस्व भी जिले में ही सुरक्षित रह सकेगा।
